• AAKRITI ART FOUNDATION'S
    "COLOURS OF SPRING"
    31-Oct-2019
    TO
    03-Nov-2019
    Cymroza Art Gallery
    72, Bhulabhai Desai Rd, Mumbai-26

INTRODUCTION

Art can never be fettered by any limitation. Powered by the sap of imagination, it is like the bird that can power its flight from zero to the infinite.
Art is not subservient to any medium. It's a tangible form of imagination that can be manifested in numerous formats.
Art could find its genesis in verses. It could also be among colours or within the strands of a brush or on the surface of canvas. May be in the celestial world of stars or possibly in a courtyard
In one such courtyard where new saplings are born day in and day out, seems like it is there where I found my sprout.

- SANDEEPA

कला कभी भी किसी सीमा में बँधी नहीं होती, वह तो कल्पना के मंथन से निकले उस पंछी की भाँति है जो अपने पंख फैलाकर शून्य से अनंत का फासला तय कर लेता है.
कला कभी भी एक माध्यम की मोहताज नहीं वह तो कल्पना का सार्थक रूप बन किसी भी रूप मे प्रस्तुत हो जाती है.

कहीं शब्दों मे तो कहीं रंगों में ,कभी कलम से तो कभी कैनवस पर,कहीं मिट्‍टी से तो कहीं तारों से असीम संभावनाओं के आंगन मे उसका पोषण होता है.

उस आंगन मे नित् नए पल्लव खिलते है, वही कही मेरा भी अँकुर फूटा है.

- संदीपा

AAHLAD

ART SERIES 1

  आह्लाद मेरी उन रचनाओं का उत्सव है जो शाश्वत है ,सत्य है,मेरे लिए और सम्पूर्ण कायनात के लिए। जन्म और मृत्यु तो परम ब्रह्म के अधीन है परंतु इसके बीच का जीवन तो हमारे और हमारे कर्मों के वशीभूत है। मेरी ये रचनाएँ हमें हमारे अस्तित्व का बोध कराती है और उस शक्ति का भी जिसे हैं ब्रह्म कहते है. 

Aalhaad is the celebration of my creations that are replete with truth and perpetuity. While Birth and Death are governed by the almighty but human life in between these two is under the subjugation of oneself and one’s deeds.

ANANT

ANANT
ब्रह्मांड की अनंत गहराई, दॄष्टि ओझल होता कोई बिंदु और असीम फैलाव जो किसी भी एक फ्रेम में कैद नहीं हो सकता परंतु उसकी झलक मात्र ही आह्लादित कर देती है. अनंत की एक झलक मेरी कृति अनंत में.


Fathomless depth, a disappearing dot and infinite spread can together define the universe. That cannot be together captured in a frame. Yet, a glimpse of this can exhilarate anyone. Presenting, a glimpse of endless (anant) universe in my creation Ananth!

SRIJAN

SRIJAN
प्रकृति की उत्कृष्ट रचना है, प्राणी जीवन और उसी में गुथी हुई है भावनाओं की डोर, प्रेम की डोर जीवन का सम्पूर्ण ताना - बाना प्रकृति, प्रेम और मिलन के चारों ओर बुना गया। इसी प्राकृतिक, नैसर्गिक को हम शिवलिंग के रूप पूजते है। जीवन नर व मादा के पारस्परिक आकर्षण का केन्द्र है। मेरी इस रचना में पहली फ्रेम उसी नैसर्गिक आकर्षण को इंगित कर रही है। तो उर्जा के पुंज की भांति नव जीवन कहीं दूर स्थित हैं।
दूसरी फ्रेम में आकर्षण का भावनाओं के साथ प्रस्तुतिकरण है। मिलन की इस अवस्था में नव जीवन की उपस्थिति अधिक करीब आ जाती हैं। और तीसरी फ्रेम इंगित करती हैं कि प्रेम भावना से फूटा अंकुर केन्द्र बन जाता है। मेरी यह रचना एक संपूर्ण जीवन की कहानी है ।प्रेम की कहानी है ईश्वरीय रचना का सांकेतिक प्रस्तुतिकरण है।


Life is amongst the finest creations of nature. Sewn as an inseparable part of life are emotions. The entire knitwear of life is intertwined around nature, love and togetherness. And this disposition of nature is worshipped in the form of Shiv-ling. Life revolves around the mutual attraction between yin and the yan. The first frame of this creation is symptomatic of this natural attraction. Where in, the new life, like the comet of energy, is situated far away. Attraction with emotions form the part of the second frame. Intimacy in this situation brings new life closer to reality. And thus, the third frame indicates that love takes birth out of the sprouts of emotion. This creation of mine is the story of entire life, a story of love. And symbolic presentation of God’s creation.

SHIVSHAKTI

SHIVSHAKTI
इस सृष्टि की रचना तालमेल और सृजन शिव और शक्ति क संतुलित अस्तित्व है.शिव की प्रतिकृति नीला अम्बर तो शक्ति क समावेश,उर्जा का संचालन करता लाल रंग. दोनों भिन्न भी, एक समन्वय भी.
यही सृष्टि है,यही शिव शक्ति है.


The creation, The composition and The synergy of universe are testimony to the balanced existence of Shiv and Shakti. Blue sky represents Shiva while energetic red explains the spirit of Shakti. The two are different and yet coordinated. This is universe. This is Shiv and Shakti.

SARANSH

SARANSH
जन्म,जरा और मृत्यु ये जीवन के शाश्वत है.
जीव जब जन्म लेता है तो जीवन के कई सोपान उसे चढ़ने होते है,अनेकानेक संभावनाओं और अकथित भविष्य के सोपान....
जीवन कि इस उत्तरोत्तर यात्रा में एक पड़ाव यौवन आता है. कई सपने,आकांक्षाएँ, आशाएँ,उपलिब्धयाँ,आदि आदि अल्पविरामो को लिए,जहाँ से फासला तय करते-करते जीव जरा अवस्था तक आ जाता है परंतु उसकी आकांक्षाओं के अल्पविराम कभी भी पूर्णविराम में नहीं बदल पाते और वह एक विस्मय-भरे लोक में लौट जाता है जिसे हम मृत्यु कहते है.
एक पुंर्नविश्वास के साथ जिसे हम पुर्न्जन्म कहते है. मेरी यह सांकेतिक रचना जीवन क संपूर्ण सार कुछ संकेतों में व्यक्त करती है.


Birth, old age and death are perpetual of life. When a life comes into existence it goes through many phases.
Multiple phases of possibilities and unknown future. During this journey there is a mile stone called youth which is marked by dreams, desires, hopes, achievements etc. etc. These are commas (,) travelling through them life comes to another stage called old age, but these commas never morphed into full stops. But returns into a territory marked by exclamation which you all call death. Through a faith we called rebirth. This is a symbolic creation of essence of life.